Up Board Solutions For Class 8 Hindi Chapter 11 आत्मनिर्भरता (मंजरी)&Nbsp;पाठ का सार (सारण)

UP Board Solutions for Class 8 Hindi Chapter 11 आत्मनिर्भरता (मंजरी) पाठ का सार…

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मनुष्य को नम्रता और स्वतन्त्रतापूर्वक, बिना अहंकार के मर्यादापूर्ण जीवन बिताना चाहिए। इससे आत्म निर्भरता आती है। आत्म-मर्यादा के लिए बड़ों को सम्मान और छोटे और बराबर वालों के प्रति कोमलता का व्यवहार करना चाहिए। अपने व्यवहार में नम्र रहकर उद्देश्यों को उच्च रखना ही ऊँचा तीर चलाना है। महाराणा प्रताप ने जंगलों की खाक छानी परन्तु अधीनता न मानी क्येकि अपनी मर्यादा की चिन्ता ज़ितनी स्वयं को होती है, दूसरे को नहीं। दूसरों की उचित बात समझते हुए अन्धभक्त नहीं होना चाहिए। तुलसीदास जी की सर्वप्रियता और कीर्ति उनकी आत्मनिर्भरता और मानसिक स्वतन्त्रता के कारण थी।

उनके समकालीन केशवदास विलासी राजाओं की कठपुतली बने रहे। अन्त में उनकी बुरी गति हुई। एक इतिहासकार के कथनानुसार, “प्रत्येक आदमी का भाग्य उसके हाथ में है। वह अपना जीवन-निर्वाह श्रेष्ठ रीति से कर सकता है। यह भाव चाहे इस स्वतन्त्रता, स्वावलम्बन आदि कुछ कहो, मनुष्य और दास में अन्तर कराता है। हनुमान ने अकेले सीता जी की खोज कर डाली और कोलम्बस ने अमेरिका को ढूंढ निकाला। शिवाजी ने थोड़े सैनिकों से औरंगजेब की नींद हराम कर दी और एकलव्य ने बिना गुरु के जंगल में निशाने पर निशाने लगाकर तीरन्दाजी में सिद्धि पाई।”

यही चित्त-वृत्ति है जो मनुष्य को औरों से उच्च बनाती है। जिस मनुष्य की -बुद्धि और चतुराई उसके हृदय में स्थित है, वह जीवन और कर्म-क्षेत्र में श्रेष्ठ रहता है और दूसरों को भी मार्गदर्शन करता है।